विदेश व्यापार घाटा कम करने में राजस्थान बन सकता है देश का ग्रोथ इंजन : ARTIA

जयपुर। चालू वित्त वर्ष के पहले दो महीनों में देश का विदेश व्यापार घाटा लगभग 5.34 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया है। इस अवधि में निर्यात 8.41 लाख करोड़ रुपये तथा आयात 13.75 लाख करोड़ रुपये रहा। अखिल राज्य ट्रेड एंड इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आरतिया) के स्टडी ग्रुप का मानना है कि यह चुनौती राजस्थान के लिए एक बड़े औद्योगिक एवं निवेश अवसर के रूप में सामने आई है। स्टडी ग्रुप में विष्णु भूत, कमल कंदोई, आशीष सराफ, प्रेम बियानी, जसवंत मील, ओ.पी. राजपुरोहित, कैलाश शर्मा, मधुसूदन शर्मा, हरि शर्मा, संजय शर्मा, अभिषेक गुप्ता, सुरेश बंसल ने अपने सुझाव दिये।

रिपोर्ट के अनुसार देश में सर्वाधिक आयात पेट्रोलियम उत्पादों (3.91 लाख करोड़ रुपये), इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं (2.73 लाख करोड़ रुपये) तथा मशीनरी (1.03 लाख करोड़ रुपये) का हुआ है। इसके अतिरिक्त खाद्य तेल, उर्वरक, कोयला, रसायन, प्लास्टिक, आयरन-स्टील, नॉन-फेरस मेटल्स, परिवहन उपकरण, फार्मास्यूटिकल्स एवं अन्य औद्योगिक उत्पादों का आयात भी बड़े स्तर पर जारी है। विशेष रूप से खाद्य तेल के आयात में 51 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है।

स्टडी ग्रुप के अनुसार जिन देशों से भारत का आयात तेजी से बढ़ा है, उनमें ओमान (274%), पेरु (267%), ब्राजील (180%), नाइजीरिया (81%), रूस (40%), थाईलैंड (32%), मलेशिया (30%), दक्षिण कोरिया (26%), सऊदी अरब (23%) तथा चीन और सिंगापुर (22-22%) प्रमुख हैं। यह स्थिति देश में आयात प्रतिस्थापन आधारित औद्योगिक विकास की आवश्यकता को रेखांकित करती है।

आरतिया का मानना है कि कृषि, खनिज संपदा, पर्याप्त भूमि उपलब्धता और भौगोलिक विस्तार के आधार पर राजस्थान इन आयातित उत्पादों के बड़े हिस्से के उत्पादन का प्रमुख केंद्र बनने की क्षमता रखता है। वर्तमान में राजस्थान का वार्षिक निर्यात लगभग एक लाख करोड़ रुपये है, जिसे योजनाबद्ध प्रयासों और बड़े निवेश आकर्षण के माध्यम से कई गुना बढ़ाया जा सकता है।

संस्था ने सुझाव दिया है कि राज्य में निवेश आकर्षित करने के लिए औद्योगिक नीतियों का सरलीकरण, आवश्यक अनुमतियों की त्वरित व्यवस्था, लॉजिस्टिक अवसंरचना का विस्तार तथा उद्योग जगत, विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं के साझा सहयोग से एक दीर्घकालिक रोडमैप तैयार किया जाए। इससे राजस्थान देश के आयात बिल को कम करने, निर्यात बढ़ाने और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

आरतिया का कहना है कि यदि राजस्थान इस दिशा में दूरदर्शी पहल करते हुए आयात प्रतिस्थापन एवं निर्यातोन्मुख औद्योगिक विकास की रणनीति अपनाता है, तो वह न केवल देश के विदेश व्यापार घाटे को कम करने में अग्रणी भूमिका निभा सकता है, बल्कि इस क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य (Leading State) बनकर औद्योगिक विकास, निवेश आकर्षण और रोजगार सृजन का नया मॉडल भी प्रस्तुत कर सकता है। इससे राजस्थान की पहचान केवल एक बड़े राज्य के रूप में नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक आत्मनिर्भरता के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित हो सकती है।

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