24 घंटे बाजार खोलने की योजना के लिएसरकार करे स्टेक होल्डर्स से विस्तृत मंथन: ARTIA

जयपुर। राजस्थान सरकार ने प्रदेश के 123 शहरों में मॉल, दुकान और रेस्तरां सहित सभी बाजार 24 घंटे खोलने की जो योजना प्रस्तुत की है, उस पर प्रदेश भर के व्यापारियों से मिले इनपुट के बाद अखिल राज्य ट्रेड एंड इंडस्ट्री एसोसिएशन आरतिया की हाई लेवल कमेटी की एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें सरकार से यह आग्रह किया गया कि यह फैसला प्रभावी हो उसके पहले राजस्थान सरकार सभी 123 शहरों के व्यापारियों, उनके संगठनों की मीटिंग ले और उनसे इस पहल के कारण आ सकने वाली दिक्कतों-परेशानियों पर मंथन कर उनका निदान करने की चेष्टा करे। आरतिया की बैठक में विष्णु भूत, कमल कंदोई, आशीष सर्राफ, जसवंत मील, प्रेम बियाणी, दिनेश गुप्ता, कैलाश शर्मा, ओ पी राजपुरोहित, डॉ. रमेश मित्तल, मुकेश शाह, जितेंद्र अग्रवाल, ज्ञान प्रकाश, अजय गुप्ता, राजीव सिंहल, तरूण सारडा, आयुष जैन आदि उपस्थित थे।
बैठक में यह सुझाया गया कि हर व्यवसाय की अपनी प्रकृति होती है, अलग-अलग प्रकृति के व्यवसाय के रात्रिकालीन संचालन में अपनी-अपनी दिक्कतें होती है। इन दिक्कतों को समझ कर समाधान करना भी महत्वपूर्ण है। यहां सरकार के लिए जरूरी है कि अलग-अलग प्रकृति वाले व्यवसायों जैसे कपड़ा बाजार, जैम एंड ज्वैलरी बाजार, ग्रॉसरी बाजार, होटल व रेस्टोरेंट, हार्डवेयर एवं भवन निर्माण सामग्री, इलेक्ट्रॉनिक व इलेक्ट्किल्स, आटोमोबाइल, फल-सब्जी, स्ट्रीट हॉकर्स आदि की प्रकृति के अनुसार इनके कारोबारियों से बातचीत कर वस्तु-स्थिति को देखा और समझा जाये। हर बाजार की अपनी ग्राहकी होती है और रात्रि कालीन परिचालन प्रारंभ हो तो ग्राहक का मनोविज्ञान भी दृष्टिगत रखना आवश्यक है, क्योंकि बिना ग्राहक बाजार नहीं होता। इस तरह ग्राहक-समूहों से बातचीत कर उनसे मिले इनपुट के आधार पर कुछ बातें तय करना भी आवश्यक होता है।
टीम आरतिया का कहना है कि एक व्यापार संचालन में सरकारी विभागों से तारतम्य की अपनी भूमिका होती है, जिनके सहारे व्यापार और बाजार चलता है। इनमें परिवहन विभाग, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, स्थानीय निकाय की ओर से सुलभ कराई जाने वाली साफ-सफाई व बिजली व्यवस्था, पुलिस सुरक्षा, बैंकिंग व बीमा, डाक सेवा, पर्यटन, श्रम विभाग व अन्य कई विभाग आदि महत्वपूर्ण हैं, इन विभागों की ओर से 24 घंटे व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए सरकार की क्या तैयारी है यह भी देखा जाना आवश्यक है। रात्रि कालीन बाजार व्यवस्था प्रारंभ होने के साथ सामाजिक जीवन का परिदृश्य भी दृष्टिगत करना होगा, व्यापारी और ग्राहक ही नहीं बल्कि सरकारी विभागों के नजरिये से ऐसे में क्या-क्या विषमताएं आती हैं और विसंगतियां पैदा होती है, उनका पूर्वाकलन तथा उपजी परिस्थितियों का निदान भी देखा जाना आवश्यक होगा।
सबसे महत्वपूर्ण है आर्थिक मूल्यांकन, अर्थात एक व्यापारी के लिए रात्रि काल में व्यापार परिचालन की लागत कितनी आती है और उसकी बिक्री कितनी हो पाती है। क्योंकि रात्रिकाल में वह कारोबारी स्थल पर बैठा रहा और ग्राहकी अपेक्षा अनुरूप नहीं आई, तो इसके उद्देष्य पूरे नहीं हो पायेंगें। इसी तरह देखने वाली बात यह है कि रात्रि बाजार प्रारंभ होने के साथ बाजार का समग्र परिदृष्य क्या होगा, वह विष्लेषण वाली बात है, क्योंकि जिन उत्पादों-सेवाओं के बाजार बढ़ाने की मंशा है वह कहीं पिछड़े न रह जायें और जिन उत्पादों-सेवाओं के बाजार सामाजिक दृष्टि से कदाचित विसंगति बढ़ाने वाले हों, कहीं उन्हें लीड न मिल जाये। एक आशंका है कि कुछ क्षेत्र विशेष को इस फैसले का बेजा लाभ मिल सकता है और कुछ क्षेत्रों को अपेक्षा से बेहतर रेस्पोंस मिलना मुश्किल न हो जाये। संगठित और असंगठित के बीच बढ़ता असंतुलन इससे कितना प्रभावित होगा उसका मूल्यांकन भी महत्वपूर्ण है, जो कि फीड बैक के आधार पर देखा जाये। आरतिया टीम इनपुट के आधार पर एक सुझाव यह भी है कि इसे पायलट प्रोजेक्ट के तहत एक शहर में परिक्षण के तौर पर लागू करके इसका मूूल्यांकन किया जा सकता है, ताकि इसे अधिक प्रभावी रूप से लागू करने में मदद मिलेगी।

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