ARTIA ने किया आग्रह, नेशनल बोर्ड ऑफ ट्रेड की तरह कार्यरत हो व्यापार कल्याण बोर्ड
जयपुर। अखिल राज्य ट्रेड एंड इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आरतिया) ने राजस्थान सरकार से आग्रह किया है कि भारत सरकार के उद्योग व वाणिज्य मंत्रालय के अधीन कार्यरत नेशनल बोर्ड ऑफ ट्रेड की तरह राजस्थान व्यापार कल्याण बोर्ड को गतिशील किया जाये, साथ ही इस बोर्ड की इकाइयों का गठन जिला स्तर पर हो और समग्र संचालन के लिए न्यूनतम पचास करोड़ रुपए का बजटीय प्रावधान सुनिश्चित किया जाए। टीम आरतिया का कहना है कि नेशनल बोर्ड ऑफ ट्रेड की राष्ट्रीय स्तर की बैठक हर महीने नियमित होती है तथा हर सोमवार ज़ूम मीटिंग के जरिए सभी व्यापारियों की समस्याएं सुनी जाती हैं, दस से अधिक विभागों के सक्षम अधिकारी मौजूद रहते हैं और तत्काल समस्याओं का समाधान भी करते हैं। इसी तर्ज पर अगले वित्त वर्ष के प्रारंभ होने के पूर्व राजस्थान सरकार इस बोर्ड की प्रदेश व जिला स्तरीय टीम गठित करे और उद्योग भवन परिसर में प्रदेश मुख्यालय के लिए कार्यालय आवंटन भी। ताकि इस बोर्ड का कार्य परिचालन प्रारंभ हो। यह बोर्ड हर पखवाड़े प्रदेश स्तरीय बैठक आयोजित कर व्यापारियों की समस्याओं का समाधान करे। साथ ही हर सप्ताह व्यापार से संबंधित सभी विभागों के सक्षम अधिकारियों की मौजूदगी में न्यूनतम दो घंटे की ज़ूम मीटिंग भी आयोजित करे।
टीम आरतिया के विष्णु भूत, कमल कंदोई, आशीष सर्राफ, जसवंत मील, प्रेम बियाणी, कैलाश शर्मा, ओ पी राजपुरोहित, ज्ञान प्रकाश, अजय गुप्ता, दिनेश गुप्ता, राजीव सिंघल, सज्जन सिंह, तरूण सारडा, एच एम जौहरी और आयुष जैन ने कहा है कि बजट पुस्तिकाओं में कुछ मदें ऐसी हैं, जो अत्यधिक महत्वपूर्ण है लेकिन उनके लिए बजटीय प्रावधान नहीं किए गए हैं। इन मदों में जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान नवाचार और उद्यमिता विकास, मेक इन इंडिया को आगे बढ़ाने वाले विनिर्माण मिशन, पी एम ई ड्राइव योजना, औद्योगिक आवास योजना तथा निर्यात संवर्धन मिशन वाणिज्य महत्वपूर्ण हैं।
टीम आरतिया रिसर्च विंग के एक इनपुट पर आरतिया पदाधिकारियों ने मंथन किया और कहा है कि राजस्थान सरकार के उद्योग विभाग द्वारा प्रस्तुत अनुदान योजनाओं की प्रदेश के सभी रीको औद्योगिक क्षेत्रों तथा व्यापार मंडलों व संगठनों के सहयोग से निवेशकों को तथ्य परक व पारदर्शी कार्यप्रणाली के साथ जानकारी दी जाये, ताकि इन योजनाओं का लाभ निवेशकों को मिले, निवेश हो, प्रदेश में रोजगार व राजस्थान सरकार का राजस्व बढ़े।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2026-27 के बजट प्रस्तावों में राजस्थान सरकार ने उद्योग विभाग के जरिए अनेक अनुदान योजनाओं की जानकारी दी है। इनमें मुख्यमंत्री लघु उद्योग प्रोत्साहन योजना के तहत 260 करोड़ रुपए, माइक्रो एंड स्माल एंटरप्राइजेज क्लस्टर डेवलपमेंट कार्यक्रम के तहत 8.05 करोड़ रुपए, एक जिला एक उत्पाद योजना के तहत 19 करोड़ रुपए, एकीकृत क्लस्टर विकास योजना के लिए 33.40 करोड़ रुपए, विश्वकर्मा युवा उद्यमी प्रोत्साहन योजना के तहत 120 करोड़ रुपए, मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के तहत 101 करोड़ रुपए से अधिक, भीमराव अंबेडकर राजस्थान दलित आदिवासी उद्यम प्रोत्साहन योजना के तहत 81.48 करोड़ रुपए, राजस्थान निर्यात संवर्धन नीति 2024 के तहत 22.75 करोड़ रुपए के अनुदान का प्रावधान रखा है। इसके अलावा अनुसूचित जाति जनजाति के लिए अतिरिक्त प्रावधान है तथा अन्य अनेक छोटी मोटी योजनाओं में भी अनुदान प्रस्तावित है।
