जगन्नाथपुरी मंदिर के मुख्य पुजारी का टीम ARTIA ने किया अभिनंदन
जयपुर। जगन्नाथपुरी मंदिर, पुरी के मुख्य पुजारी दैतापति भवानीदास जी महाराज का टीम आरतिया ने जयपुर सेंटर कल्चर एंड आर्ट्स (जेसीसीए) परिसर में सादर अभिनंदन किया। वे इन दिनों राजस्थान यात्रा पर हैं। अखिल राज्य ट्रेड एंड इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आरतिया) की ओर से आशीष सर्राफ, प्रेम बियाणी, कैलाश शर्मा, ओ पी राजपुरोहित, आनंद पोद्दार, रमेश मित्तल, सज्जन सिंह, दिनेश गुप्ता, सुरेश बंसल, दिनेश शर्मा, जगन्निधि जत्ती तथा ललित भारद्वाज ने महाराज को दुपट्टा तथा मोतियों की माला समर्पित कर अभिनंदन किया।
जेसीसीए के तरूण सारडा ने प्रारंभ में आगंतुक अतिथि गणों का परिचय कराया। ओ पी राजपुरोहित ने जगन्नाथ पुरी धाम के बारे में जानकारी दी और वहां के महत्व को प्रतिपादित किया।
अपने उद्बोधन में दैतापति भवानीदास जी महाराज ने कहा कि जगन्नाथपुरी धाम देश के चारधामों में से एक है और इसका पौराणिक व वैदिक कालीन महत्व तथा कथाक्रम है। जगन्नाथ पुरी धाम विराजमान भगवान जगन्नाथ साक्षात हैं और वहां अनेक बातें ऐसी हैं जिन पर विज्ञान भी आश्चर्यचकित है। एक उदाहरण दिया कि वहां प्रसाद के लिए जो खिचड़ी बनती है, वह सात हांडियों में एक के ऊपर एक रखकर चूल्हे पर पकाई जाती है। खास बात यह है कि जो सबसे ऊपर हांडी होती है, उसमें खिचड़ी सबसे पहले पकती है, जबकि चूल्हे का ताप सबसे नीचे वाली हांडी को पहले मिलता है।
उनका कहना था कि जगन्नाथ प्रभु सच में जगत प्रभु हैं, जो सच्चाई से उन्हें याद करता है उसकी वे सही मायने में संपूर्ण रक्षा करते हैं और उसका ध्यान रखते हैं। महाभारत के एक प्रसंग का उदाहरण देकर उन्होंने बताया कि युद्ध उपरांत अर्जुन ने श्रीकृष्ण ने कहा कि प्रभु युद्ध में मेरे हाथ से हजारों सैनिक मारे गए, ब्रह्म हत्या का पाप लगा है, निस्तारण कैसे हो ? श्रीकृष्ण ने भगवान जगन्नाथ दर्शन कर वहां निवेदन की सलाह दी, श्रीकृष्ण की सलाह मान अर्जुन वहां आये और ब्रह्म हत्या निवारण के लिए निवेदन किया।
दैतापति भवानीदास जी महाराज ने यह भी कहा कि जगन्नाथ भगवान का एक मंदिर राजस्थान में बनाने की योजना है, यह मंदिर विधि व शास्त्र सम्मत होगा। इस मंदिर के लिए राजस्थान में बहुत सकारात्मक भाव है। आरतिया के अध्यक्ष विष्णु भूत व चेयरमैन कमल कंदोई का कहना है कि यह मंदिर बन जाने पर राजस्थान की धार्मिक पर्यटन इकोनॉमी को भरपूर बढ़ावा मिलेगा।
