प्री बजट मेमोरंडम में ARTIA ने कहा, कृषि मंडी शुल्क हो समाप्त
जयपुर। अखिल राज्य ट्रेड एंड इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आरतिया) ने राजस्थान सरकार को बजट-2026-27 के लिए प्रेषित प्रतिवेदन में मुख्य मांग यह की है कि राजस्थान में कृषि मंडी शुल्क समाप्त किया जाए। इसलिए कि राजस्थान की अर्थव्यवस्था का आधार कृषि है और कृषि उत्पादों की समर्थन मूल्य पर दस प्रतिशत भी खरीद नहीं होती। 90 फीसदी से अधिक खरीद मंडी व्यापारी ही करते हैं, उन्हीं के मनी सर्कुलेशन से कृषि अर्थव्यवस्था का संचालन होता है, अतः मंडियों में कृषि जिंसों के व्यापार को सुगम बनाने के लिए सरकार कृषि मंडी शुल्क करने से इस व्यापार व व्यवस्था को प्रौत्साहन मिलेगा।
टीम आरतिया ने औद्योगिक निवेश के लिए सुझाया है कि प्रत्येक जिला उद्योग अधिकारी कार्यालय को रिजल्ट ओरियेंटेड बनाया जाये, जहां निवेशक को प्रभावी सिंगल विंडो स्कीम के जरिए सभी आवश्यक सरकारी अनुमतियां अधिकतम एक माह में सुनिश्चित हो। इसी तरह जिस निवेशक को कोलेटरल फ्री उधार की जरूरत हो, उसके लिए संबंधित जिला कलेक्टर जिले के लीड बैंक से समन्वय कर अधिकतम एक पखवाड़े में स्वीकृति व वितरण की व्यवस्था करवायें। इसलिए कि केंद्र सरकार के दिशा निर्देश उपरांत भी बैंक कोलेटरल फ्री उधार देने में कोताही बरतते हैं। ऐसे मामलों में जिला कलेक्टर एक पखवाड़े में एक बैठक आयोजित करें और तमाम आवेदनों को वरीयता के आधार पर उधार सुनिश्चित करवायें।
आरतिया ने रीको के संदर्भ में सुझाया है कि रीको का वार्षिक लाभ 800 करोड़ रुपए औसत से भी अधिक है। रीको के तमाम औद्योगिक क्षेत्रों में इन्फ्रास्ट्रक्चर के पुनर्निर्माण की जरूरत है और जो सुविधाएं सुलभ नहीं हैं वे उपलब्ध कराने की आवश्यकता है। इस समय 425 से अधिक औद्योगिक क्षेत्रों में सुनियोजित सड़कों व बेहतर ड्रेनेज सिस्टम की जरूरत है और साथ ही उद्योग इकाइयों से निकले अवशिष्ट जल की रिसाइक्लिंग परियोजनाओं की। रीको के पास बड़ा रिजर्व फंड है और वार्षिक आय भी 1800-2000 करोड़ की। आवश्यक प्रशासनिक खर्च के उपरांत रीको के पास पर्याप्त धन है, जिसका उपयोग इन्फ्रास्ट्रक्चर के पुनर्निर्माण पर हो।
आरतिया ने राजस्थान सरकार का ध्यान रिटेल कारोबारियों के सामने आनलाइन व मल्टीनेशनल रिटेल कंपनियों से आ रही चुनौतियों की तरफ दिलाया है और सुझाया है कि खुदरा दुकानदारों की सुरक्षा के लिए सेफगार्ड सुनिश्चित हो और इसके लिए आनलाइन व मल्टीनेशनल रिटेल कंपनियों पर 8 प्रतिशत की दर से शुल्क लगाया जाये। खुदरा दुकानदार हमारी बाजार व्यवस्था के पोषक व संचालक हैं, सुबह से लेकर रात तक उपभोक्ता की सेवा में हाजिर हैं, उनके हितों की रक्षा के लिए राज्य सरकार यह पहल करे।
आरतिया ने यह भी कहा है कि जीएसटी लागू हुए साढ़े आठ साल से अधिक हो गया है, लेकिन जीएसटी ट्रिब्यूनल न होने के कारण कारोबारियों को बहुत परेशानी हो रही है। इसलिए कि कारोबारियों के मामले में जीएसटी अधिकारी जो फैसले देते हैं, उसमें कारोबारी मुख्यालय स्थित अपीलीय अधिकारी को जो अपील करते हैं उनमें अधिकतर जीएसटी अधिकारी के फैसले ही सुनिश्चित रखे जाते हैं। ऐसे में कारोबारी या तो कर बोर्ड जाये या हाईकोर्ट, नतीजा कारोबारी पर समय, श्रम व धन पेटे अनावश्यक बोझ आ जाता है। ट्रिब्यूनल वैसे भी संवैधानिक आवश्यकता है यह जीएसटी लागू होने के साथ प्रभावी होनी चाहिए थी। लिहाजा इसका इंतजार है।
