निवेश व सोशल-इन्फ्रा की बड़ी इबारत लिख सकते हैं अप्रवासी राजस्थानी

जयपुर। 10 दिसंबर 2025, बुधवार को आयोजित अप्रवासी राजस्थानी सम्मेलन राजस्थान के विकास में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है और अप्रवासी राजस्थानी निवेश तथा सामाजिक इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास की नई इबारत लिख सकते हैं। यह कहना है टीम आरतिया का। आरतिया के विष्णु भूत, कमल कंदोई, आशीष सर्राफ, जसवंत मील, अजय गुप्ता, ज्ञान प्रकाश, प्रेम बियाणी, कैलाश शर्मा, ओ. पी. राजपुरोहित, सज्जन सिंह, राजीव सिंहल, सुनील बंसल, पवन शर्मा, सुमित विजय, रमेश मित्तल, दिनेश गुप्ता, तरुण सारड़ा, एच. एम. जौहरी तथा आयुष जैन का कहना है कि प्रवासी राजस्थानी परिवारों को राजस्थान सरकार, जनप्रतिनिधियों तथा अधिकारियों से पूरी सच्चाई के साथ भावनात्मक सहयोग चाहिए। उसके प्रत्युत्तर में वे कलेजा खोलकर राजस्थान के लिए बहुत कुछ कर सकते हैं।

टीम आरतिया का कहना है कि अभी राजस्थान का औद्योगिक विकास बड़े पैमाने पर होना है और इसके लिए अपार संभावनाएँ हैं। बड़े उद्योगों में सीमेंट और जिंक तक राजस्थान मोटे तौर पर सीमित है, जबकि अनेक ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ बड़े उद्योगों में प्रचुर निवेश संभव है। सोलर एनर्जी में सतत बढ़ता निवेश इस बात की मिसाल है कि राजस्थान अन्य अनेक उत्पाद क्षेत्रों में देश का बड़ा केंद्र बन सकता है। राजस्थान सरकार की ओर से निवेश को बढ़ावा देने के लिए अनेक योजनाएँ और नीतियाँ प्रस्तुत की गई हैं। राजस्थान फाउंडेशन के ज़रिए प्रवासी राजस्थानी परिवारों को राज्य से जोड़ने की पहल भी लगातार जारी है। उद्योग विभाग, बीआईपी, रीको आदि अपनी भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। यह सब मिलकर प्रवासी राजस्थानी उद्यमी परिवारों को अपनी माटी की ओर लौटने में बहुत मददगार साबित हो सकता है—इसकी पूरी उम्मीद है।

टीम आरतिया के अनुसार पाँच थ्रस्ट क्षेत्रों में राजस्थान लीड ले सकता है। इनमें पहला है टूरिज़्म, दूसरा है ग्लोबल लेवल की एजुकेशन, तीसरा है मेडिकल फैसिलिटीज, चौथा है इलेक्ट्रॉनिक्स व इलेक्ट्रिकल उत्पादों तथा खिलौनों का उत्पादन, और पाँचवाँ है वैज्ञानिक शोध व आविष्कार। इन पाँचों क्षेत्रों में अप्रवासी राजस्थानी व्यवसायिक परिवारों की निवेश के लिहाज से रुचि है और उसके लिए अनुकूल सहयोग राजस्थान सरकार से मिलना चाहिए। इस क्रम में राजस्थान सरकार अप्रवासी निवेश बोर्ड का गठन करे, जो अप्रवासी उद्यमी परिवारों को सतत सहयोग दे। उन्हें ज़मीन उपलब्ध कराने, बिजली–पानी–संचार सेवाएँ सुलभ करवाने, उनके उद्योग स्थल तक सड़क सुविधा उपलब्ध कराने तथा राज्य व केंद्र सरकार द्वारा आवश्यक अनुमतियाँ दिलवाने में सहयोग करे। यह अगर हो जाता है तो अकल्पनीय निवेश राजस्थान में आ सकता है।

इसी के समानांतर यह बात भी महत्वपूर्ण है कि अप्रवासी परिवार राजस्थान में भामाशाह के तौर पर बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। अपने गाँवों–कस्बों की सरकारी स्कूलों–अस्पतालों आदि में सामाजिक इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए बड़ा काम कर सकते हैं। ऐसा करने के लिए प्रेरणादायक तंत्र राजस्थान सरकार विकसित करे। ग्राम, उपखंड व तहसील स्तर के अधिकारी प्रवासी परिवारों से समन्वय करें—इस आशय के निर्देश उन्हें जारी हों। इन प्रवासी परिवारों को जयपुर सम्मेलन तक ही सीमित नहीं रखा जाए, बल्कि उन्हें उनके गाँव–कस्बों की विज़िट करवाने और उनकी मंशा–अनुरूप सोशल इन्फ्रा के काम में सहयोग करने की सोच भी सरकारी तंत्र में विकसित हो।

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